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"गूगल बज़" शुरू करें या कहें "गूगल अब बस" कर!

गूगल ने 'गूगल बज़' सर्विस लाया नहीं की उसका विरोध और निंदा होना भी शुरू हो गया.... वहीँ कुछ समर्थन में भी आगे आये... और कई तो यही कह रहे हैं की गूगल ने गूगल बज़ को जबरन जीमेल उपभोक्ता पर थोपा है...

हाँ गूगल बज़ शुरू करने में गूगल ने कुछ तकनीकी एवं वैचारिक अनदेखी जरुर की है जैसे की गूगल बज़ शुरू होते ही आपके गूगल संपर्क में जुड़े लोग स्वत: ही आपके बज़ में जुड़ जाते है और सार्वजानिक रूप से आप के प्रोफाइल में दिखने लगते है| परन्तु यदि आप ये नहीं चाहते की आपके संपर्क सार्वजनिक हों तो आप अपने प्रोफाइल सेटिंग्स में जाकर इसे अपने अनुरूप परिवर्तित कर सकते है|



अपने मित्रो को बज़ सन्देश पोस्ट करने से पहले आप यह तय कर सकते हैं की इस सन्देश / बज़ को सार्वजनिक रूप से पोस्ट करना है या किसी निजी समूह को| निजी समूह आप के गूगल खाते के संपर्क में बनाये जा सकते हैं|


और हाँ, एक और बात जो आप को परेशान कर सकती है की बज़ में जो भी नया सन्देश या टिप्पणी आती है वह बज़ टैब के आलावा सीधे इनबोक्स में भी आ जाती है, जिसका कोई तुक नजर नहीं आता.... इससे निज़ात पाने के लिए आपको सेटिंग्स में जाकर एक फिल्टर तैयार करना पड़ेगा जिससे की बज़ से सम्बंधित सारे सन्देश एवं टिप्पणी इनबोक्स में आये ही ना...

अब तो बज़ शुरू करने या पहली बार नया पोस्ट लिखने पर गूगल ने यह पूछना भी शुरू कर दिया है की आप गूगल प्रोफाइल बनाना/दिखाना चाहते है या नहीं, तो यदि आप गूगल प्रोफाइल नहीं दिखाना चाहते तो बस ना चुन लीजिये....

हर सर्विस प्रदाता के अनुरूप ही गूगल भी अपने प्रयोक्ताओं को कुछ न कुछ नया और बेहतर देने की चाह रखता है और मैं तो यूँ भी कहूँगा की गूगल ने बहुत ही ज्यादा एवं बेहतरीन दिया है... बज़ जैसे सुविधा पहले से उपलब्ध रहे हैं, पर वे सब सिर्फ उसी कार्य के लिए उपयोग किये जा सकते हैं, गूगल ने यही चाह रखी है की उसके प्रयोक्ता एक ही खाते के जरिये कई सुविधा प्राप्त कर सकें तो इसमें गलत क्या है... अब ये तो प्रयोक्ता पर निर्भर करता है की वह प्रदाता के द्वारा उपलब्ध सुविधा का उपयोग करे या न करे.... ये स्वतंत्रता तो मिलती ही है......

तो..... "गूगल बज़" शुरू करें या "गूगल अब बस" कर!, यह आपके रूचि पर निर्भर करता है....







गूगल बना रहा है नया ऑपरेटिंग सिस्टम!!! "Chrome OS "


अंतरजाल खोजी यन्त्र दिग्गज गूगल अब ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने की होड़ में जुट कर अपने प्रतिद्वंदी माइक्रोसॉफ्ट को निकट भविष्य में कड़ी टक्कर देने का उद्घोष कर दिया है| अब गूगल अपने वेब पृष्ठ परिर्वतक 'गूगल क्रोम' ही की तर्ज पर 'नेट बुक' पर चलने हेतु 'क्रोम ओ.एस.' का निर्माण प्रराम्भा कर चुका है| क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम के उप संचालक सुन्दर पिचई ने १९ नवम्बर, २००९ को समाचार सम्मेलन में, गूगल क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम के एक प्रारंभिक संस्करण का प्रदर्शन किया| यह ऑपरेटिंग सिस्टम 'क्रोम ब्राउज़र' की तर्ज पर बनाया जा रहा है जो कुछ-कुछ एक डेस्कटॉप कि तरह ही कार्य करेगा| इससे पहले गूगल नें मोबाइल के लिए गूगल ऐँङ्रॉइङ ऑपरेटिंग सिस्टम पहले ही बना चुका है, जो की माइक्रोसॉफ्ट मोबाइल को टक्कर दे रहा है|

क्रोम ओएस ब्राउज़र आधारित है, और यह एक वेब ब्राउज़र के रूप में netbooks पर चलने के लिए तैयार किया जा रहा है जो की पारंपरिक डेस्कटॉप का वैकल्पिक-संचालन होगा जी की माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसे कंपनियों द्वारा निर्मित किया जाता आ रा हा है| क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम चालू होने में लगभग ७ सेकंड्स या उससे भी कम समय लेगा जो की पूरी तरह से यादृच्छिक स्मृति (RAM) में भरी जाएगी जिससे की इसका कार्य सञ्चालन तीव्र गति से हो सके| चूँकि यह ऑपरेटिंग सिस्टम अंतरजाल उपयोगकर्ताओं को ही ध्यान में रख कर बनाया जा रहा है, इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री अंतरजाल पर ही स्थित होगी| उपयोगकर्ता द्वारा बनाये गए दस्तावेज भी अंतरजाल पर स्थित संचयन प्रणाली पर संरक्षित किये जा सकेंगे| इन सभी कार्यों को सुचारू रूप से चलने के लिए अत्यंत ही तीव्र बैंडविड्थ की आवश्यकता पड़ेगी ताकी कार्य किसी रूकावट के बिना सही ढंग से चलता रहे|

गूगल क्रोम आपरेटिंग सिस्टम
उपयोगकर्ताओं के लिए निर्माण में होने वाली देरी से 2010 तक उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन यह 20 नवम्बर को डेवलपर्स के लिए मुक्त स्रोत के रूप में उपलब्ध कर दिया गया है, जिससे की डेवलपर्स इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने लायक अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री (Application Software) तैयार कर सकें|
















अन्य श्रोत:

Google Chrome OS - FAQ


Google Chrome Operating System


एम्.एस.ऑफिस प्रोफेसनल प्लस २०१० बीटा


माइक्रोसोफ्ट नें अपने एम्.एस. ऑफिस सॉफ्टवेर के नए संस्करण ऑफिस २०१० का बीटा संस्करण सभी के लिए परीक्षण हेतु नि:शुल्क उपलब्ध कराया है| इसे आप माइक्रोसोफ्ट के वेब साईट  से  अद्यतन कर सकते है| यह ३२ बिट एवं ६४ बिट दोनों में उपलब्ध है, आप अपनी सुविधा अथवा आप के विन्डोस  के संस्करण के मुताबिक इनमें से किसी भी एक का अद्यतन कर इस्तेमाल कर सकते हैं|

यह संस्करण जानकारी प्रबंधन और ई मेल से समाचार प्राप्त करने एवं अधिभार से निपटने के लिए एक असाधारण शक्तिशाली उपकरण हो सकता है|
इसका इस्तेमाल करने से पहले यह जरुरी है की आप इसकी तकनीकी जानकारी एवं होने वाली संभावित परेशानियों के बारे में बखूबी पढ़ लें तकि आपको कोई दिक्कत ना हो|

ऑफिस २०१० चलने के लिए आवश्यकताएं:
कार्यालयीन व्यावसायिक प्लस 2010 बीटा का अद्यतन/डाउनलोड करने के लिए आपके पास इंटरनेट सेवा होना जरुरी है .
आपका कम्प्युटर:
   * 500 मेगाहर्ट्ज 32-bit या 64-bit प्रोसेसर या उच्च
   * प्रणाली स्मृति या अधिक के (RAM)256 मब या अधिक
   * उपलब्ध डिस्क स्थान के 3.5 GB
   * 1024x768 या उच्च संकल्प मॉनिटर
   डीवीडी *-आर / डब्ल्यू ड्राइव
तथा
   * Windows सर्विस पैक (सपा 3) (32 बिट के साथ XP)
   थोड़ी * विंडोज (32-SP1 के साथ Vista या 64 बिट)
   * Windows Server 2003 r2 (32-bit या 64-bit)
   थोड़ी * विंडोज (SP2 32 के साथ सर्वर 2008 या 64 बिट)
   7 विंडोज (32-bit या 64-bit *)

इसका अद्यतन करने के लिए पहले आपको माइक्रोसोफ्ट के साथ पंजीकरण करना पडेगा, पंजीकरण के बाद, आप अपने लिए उपयोगी संस्करण का चयन कर सकेंगे, ३२ बिट संस्करण  ३२-बिट और ६४-बिट इन दोनों संस्करण पर कार्य कर सकने में सक्षम है| पंजीकरण के दौरान आप को पंजीकरण कुंजी दिखाई जाएगी इसे आप लिखा कर या कॉपी/पेस्ट कर के रखा लें, यह  आपको इन्सटालेसन के दौरान काम आएगा|

कार्यालय व्यावसायिक प्लस 2010 बीटा का डाउनलोड एक घंटा या अधिक लग सकते हैं, हालाँकि सही समय आपके  प्रदाता एवं बैंडविड्थ और यातायात पर निर्भर करता है| यदि आपका डाउनलोड बाधित हो जाता है, तो पुनः वहीँ से आरंभ होगा जहां यह छुट गया था|

एम्.एस.ऑफिस प्रोफेसनल प्लस २०१० बेटा  यहाँ डाउनलोड करें
           http://www.microsoft.com/office/2010/images/Logo_MSFTOffice2010_187x54.jpg






श्रोत:
ऑफिस २०१० बीटा
FAQ: All you need to try out the Office 2010 बेटा

Hands on: Office 2010 beta debuts major features

छठी इन्द्रिय (Sixth Sense)

हम ये अक्सर कहते हैं की 'ये काम तो मैं चुटकी बजाते ही कर लूँगा' ये 'ये तो मेरे बाएँ हाथ का काम है' पर क्या वास्तव में हम ऐसा कर पाते हैं? भाई मेरा जवाब तो "हाँ" है और आपका? आज तकनीकी इतनी उन्नत हो गई है की हम लगभग हर कार्य बिजली गति से कर सकने में सक्षम होते जा रहे हैं... इसी विकासक्रम में एक और क्रांति दस्तक दे रही है जो हमारे दिनचर्या को पूरी तरह बदल सकने में सक्षम होगी....

इसी तकनीकी उन्नति की दिशा में MIT विस्वविद्यालय के सहायक शोधकर्ता प्रणव मिस्त्री ने "छठी इन्द्रिय (Sixth Sense)" नामक अपने शोध उपकरण के जरिये एक बेहद ही रोमांचक एवं जादुई उन्नति को संभव बनाया है| ये तकनीकी उपकरण अभी अपने विकास पथ पर है जो जल्द ही पूर्ण रूप से उपयोग में लेन योग्य तैयार हो जायेगी|

ये तकनीकी हमारे रोजमर्रा के कार्यों में काफी तीव्रता ला सकने में सक्षम होगी| आप अपने उँगलियों के इशारे से किसी भी कार्य को आसानी से कर पाएंगे| इस तकनीकी के जरिये आप किसी अनजान व्यक्ति से मिलनें पर उसके बारे में सब कुछ उसके बताये बगैर ही जान सकेंगे हैं| आप किसी भी सतह को एक मॉनिटर की तरह प्रयोग में ला सकेंगे और कहीं पर भी इन्टरनेट पर जा पाएंगे आपको कम्प्युटर के सामने बैठने की जरुरत नहीं रह जायेगी..., आप अपनी कलाई पर वर्चुअल घड़ी पहन सकेंगे.... आप अपनी हथेली तथा उँगलियों का उपयोग एक कैलकुलेटर की तरह कर सकेंगे.... आप बस हाथों के इशारे भर से फोटो खिंच सकने उसे किसी भी सतह पर देख सकने में सक्षम होंगे... आप को किसी जानकारी के लिए अब किसी कम्प्युटर के सामने बैठ कर key-board के जरिये अपने सवाल लिखने की जरुरत नहीं रह जायेगी, किसी चीज़ की जानकारी पाने के लिए आप को बस उसे अपने सामने लाना होगा और सारी जानकारी आप के सामने हाज़िर हो जायेगी.... खरीदारी करते समय आप किसी वस्तु विशेष के बारे में किसी से पूछे बिना ही अधिक जानकारी आसानी से पा सकेंगे और उसे खरीदना चाहिए या नहीं या आसानी से तय कर सकेंगे.... एसे ही कई विशेषताएं लिए हुए है ये "छठी इन्द्रिय (Sixth Sense)" उपकरण.....इसकी कीमत ३५० डॉलर आंकी गई है.... हाल ही में टेड-टॉक के अवसर पर प्रणव मिस्त्री ने यह कहा है की इस पूरी तकनीकी को वे ओपन सोर्स कर देंगे जिससे की यह तकनीकी सभी को मुफ्त में उपलब्ध हो जायेगी पर इस तकनीकी को उपयोग में लानें के लिए उपयोगी कलपुर्जों का खर्च उठाना पड़ेगा|



SixthSense
एक प्रोजेक्टर, दर्पण और कैमरा को मिलकर बनाया गया है| यह उपकरण मोबाइल की तरह गले में पहना जाता है| प्रोजेक्टर और कैमरा उपयोगकर्ता के जेब में मोबाइल रखे कंप्यूटिंग डिवाइस से जुड़े हुए होते हैं जो इस उपकरण का सञ्चालन करता है| उपकरण में संलग्न कैमरा हमारे हाथों के हव भाव अब इशारों के आधार पर बताये गए कार्यों को अंजाम देता है जबकि प्रोजेक्टर किसी भी सतह पर हमें मॉनिटर जैसा दृश्य दिखा कर हमें उपकरण का उपयोग करने के लिए एक प्रकार का अंतरफलक या पृष्ठभूमि का कार्य करता है...



श्रोत कड़ी: छठी इन्द्रिय (Sixth Sense)

टेड टॉक

विकिपीडिया


हिन्दी में होने जा रहा है अंतराल पता...!

अब तक अंतरजाल पता और -मेल ID अंग्रेजी में ही बन सकती है, अभी अंतरजाल पता और तक -मेल ID का हिंदी में बनना तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है... जिस पर शोध एवं कार्य जारी है..... चूँकि कम्प्युटर की आतंरिक कार्यप्रणाली पूरी तरह से रोमन लिपि पर ही निर्भर करती है और विश्वजाल का पता अथवा -मेल ID जिसे एक बार जारी किये जाते हैं वह किसी और को जारी नहीं हो सकते.... इसलिय रोमन एवं देवनागरी लिपि में परस्पर सामंजस्य स्थापित होना भी जरुरी है जो अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे की रोमन लिपि में लिखा गया पता तथा देवनागरी लिपि में लिखा हुआ पता अलग-अलग पहचाना जाये....

इस पर कार्य चल रहा है... उम्मीद की जा रही है की निकट भविष्य में यह संभव भी हो जाये....

जल्द ही हो सकता है कि आपको अपनी मनपसंद वेबसाइट का पता अंग्रेजी के बजाय हिंदी में भी टाइप करने को मिल जाए।

अगर इंटरनेट कॉर्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स ऐंड नंबर्स (आईसीएएनएन) हरी झंडी दिखा देता है तो डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट जैसे वेब ऐड्रेस हिंदी और तमिल जैसी देसी भाषाओं में भी आपको मिल सकते हैं। ऐसा होने पर भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की तादाद मौजूदा 5 करोड़ से बढ़कर कई गुना हो सकती है।


दुनिया भर में तकरीबन 160 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और उनमें से 50 फीसदी से अधिक लैटिन के अलावा दूसरे अक्षरों वाली लिपि पर आधारित भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। डोमेन नामों पर नजर रखने वाले गैर मुनाफे वाले संगठन आईसीएएनएन ने इसी हफ्ते दुनिया भर से अपने प्रतिनिधियों की बैठक सोल में बुलाई है।

उसमें वेब पते हिंदी और तमिल में दिए जाने पर फैसला होगा। यदि ऐसा हो गया, तो इंटरनेट के 40 साल के इतिहास का यह सबसे बड़ा बदलाव होगा। इसके बाद गैर अंग्रेजी डोमेन नामों के आवेदन भी स्वीकार होने लगेंगे और अगले साल की दूसरी छमाही में ऐसे नाम मिलने भी लगेंगे।

मिलेंगे मनचाहे सफिक्स

वेब पर नामों में फिलहाल 21 सफिक्स (वेब पते के अंत में इस्तेमाल होने वाले शब्द) लगाए जाते हैं। इनमें डॉट कॉम सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है और तकरीबन 80 फीसदी वेब पतों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा डॉट नेट, डॉट इन्फो या देश से संबंधित सफिक्स जेसे डॉट इन भी इस्तेमाल होते हैं। लेकिन अगर नए बदलाव हो जाते हैं, तो आपको डॉट इंडियन, डॉट मुंबई, डॉट दिल्ली, डॉट अमिताभ बच्चन, डॉट पेरिस जैसे सफिक्स भी अपने वेब पते के अंत में लगाने को मिल जाएंगे।

हां, आपको उनके लिए कीमत भी अदा करनी होगी और यह कीमत 40 लाख से 2 करोड़ रुपये के बीच कुछ भी हो सकती है। कॉर्पोरेट दिग्गज भी डॉट टाटा, डॉट अंबानी, डॉट बिड़ला और डॉट रिलायंस जैसे नामों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पर हैं कुछ तकनीकी दिक्कतें:

इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी नेट४ इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ जसजीत साहनी ने मानते हैं कि भारत में इसमें कुछ वक्त लग जाएगा क्योंकि तकनीकी दिक्कतें रोड़ा बनेंगी। दरअसल फिलहाल आप हिंदी में दुकान शब्द तो टाइप कर सकते हैं, लेकिन डॉट कॉम को हिंदी में टाइप नहीं किया जा सकता।

इस मामले में आईसीएएनएन सभी देशों के सूचना प्रौद्योगिकी विभागों से बात कर रहा है ताकि डॉट कॉम का सही अर्थ हिंदी या तमिल में मिल सके। साहनी कहते हैं, 'डॉट कॉम को हिंदी में क्या कहेंगे? आपको इसका फैसला तो करना ही होगा।'

इस बैठक में हिस्सा लेने सोल जा रहे सिफी टेक्नोलॉजिज के सरकारी मामलों के अध्यक्ष नरेश अजवाणी भी मानते हैं कि वेब पते स्थानीय भाषा में देना भारत जैसे देशों के लिए बहुत अच्छा होगा। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पास 22 स्थानीय भाषाओं के फॉन्ट पहले से मौजूद हैं, इसलिए इस काम में दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

श्रोत कड़ी: बिज़नस स्टैण्डर्ड
अन्य उपयोगी कड़ी:
बहुभाषी वेब पते के लिए एक परिचय
विकिपेडिया - बहुभाषी वेब पते
बहुभाषी वेब पते सम्बंधित अधिकतया पूछे जाने वाले प्रश्न